Posted in

गुरु बिना जीवन सूना रे

गुरु बिना जीवन सूना रे

गुरु बिना जीवन सूना रे, कौन दिखावे राह,
अंधियारे में भटके जग सारा, कौन करे उजियारा…

माया मोह में फंसा हुआ है, हर जन इस संसार में,
सुख की खोज में दुख ही पाया, झूठे व्यवहार में…

सतगुरु की वाणी अमृत जैसी, पी ले जो जन प्यारा,
मन का मैल धुल जाए सारा…

चलो रे मन गुरु के द्वारे, छोड़ो सब अभिमान,
नाम जपो हरि का सदा तुम, जीवन होगा धन्य…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *