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कृष्ण के चरणों में सच्ची भक्ति का प्रेम

सच्ची भक्ति का संगाम

हे मेरे प्रभु, तेरा नाम लूँ,
तेरे चरणों में मैं सदा रहूँ।
संसार के दुखों से मैं दूर जाऊँ,
तेरे प्रेम में मैं सदा खो जाऊँ।

राधा की मूरत, तू सच्चा प्यार,
तेरे बिना अधूरा, हर एक संसार।
तेरे भजन में मिलती है शांति,
तेरे संग हर घड़ी, होती है मस्ती।

तू है सखा, तू है दाता,
तेरे भरोसे मैं हूँ सदा खड़ा।
जब भी पुकारूँ, तू पास आना,
तेरे प्रेम में सदा, मैं रहूँ फना।

हे मेरे स्वामी, मेरी हर चाह,
तेरे ही चरणों में, मिले मुझे राह।
तेरे दर पर मैं, झुकूँ बार-बार,
तू ही है मेरा, सच्चा उद्धार।

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