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कृष्ण की भक्ति में लहराता मन

कृष्ण की भक्ति में लहराता मन

कृष्ण की भक्ति में लहराता मन,
हर पल में बसी है, उनका ही चमन।
मुरली की तान से, जग में छाया सुख,
हर दिल में बसा है, उनका प्यार अनुकूख।

गोपियाँ गाती हैं, प्रेम भरे गीत,
कृष्ण के चरणों में, मिलता है सच्चा जीती।
उनकी लीला सुनकर, मन बाग-बाग हो,
राधा की मूरत में, प्रेम का आगाज हो।

हर सुबह उनकी, यादों में खो जाऊं,
कृष्ण की गोद में, सदा मैं रहूं सवाओं।
भक्ति की रुनझुन में, मन मेरा झूमे,
कृष्ण कृपा से, जीवन में सुख का गूंजे।

तेरे नाम की माला, जपता हर दिन,
कृष्ण के संग चलूँ, ये मेरा है मन।
आसमान में तारे, तेरा ही है नूर,
कृष्णा, मेरे प्राणों में, तेरा ही है सुरूर।

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